शनिवार, 2 जुलाई 2011

सपनों वाली वो लड़की यानि मैं रश्मि प्रभा



मेरी कलम ने परिचय का आदान -प्रदान किया तो भीड़ से एक आवाज़ आई जानी पहचानी - 'मुझे आपके बारे में भी जानना है ....' मेरे बारे में ? फिर कैनवस पर औरों को उकेरते हुए मैंने बार बार पलट कर खुद को देखा , कोई खासियत मिले तो कोई रंग दूँ .... जब भी देखा , उसकी आँखों में मुझे उड़ते बादल नज़र आए . कल रात मैंने कुछ बादल चुरा लिए , शायद उसके भीतर से परिचय का कोई सूत्र मिल जाए !
प्रसाद कुटी की सबसे छोटी बेटी ! हाँ अब तो वही है सबसे छोटी जबसे वह नहीं रहा - उसका छोटा भाई संजू . ६ भाई बहनों की दुनिया थी , संस्कारों की , उचित व्यवहार की सुबह होती थी . सुबह होते पापा के कमरे में सब इकट्ठे होते , कभी भजन , कभी कोई खेल , तथाकथित अच्छी सीख - 'कुछ भी करो तो सोचो , ऐसा सामनेवाला करेगा तो कैसा लगेगा !' सामनेवाले का ख्याल करते करते बीच से संजू चला गया , अच्छाई की बलिवेदी पर वह गुम हो गया . ओह ,मैं नाम तो बता दूँ खुद का - आपके बीच रश्मि प्रभा के नाम से जानी जानेवाली इस लड़की की शुद्ध पहचान इसके घर के नाम से है - 'मिन्नी' , वो भी 'काबुलीवाले की मिन्नी ' .रश्मि नाम कवि पन्त ने दिया और इस रश्मि नाम से इसने पढ़ाई की और अब लिखने लगी है . सच तो ये है कि जब रश्मि नाम से पुकारा जाता है तो वह भी इधर उधर देखती है , फिर याद करती है कि ये तो मैं हूँ ! है न अजीब सी बात ? जी हाँ अजीब बातों वाली यह लड़की अजीब सी ही है बचपन से .
छोटा सा घर पर्ण कुटी सा फूलों से भरा रहा . छोटा सा दायरा - बस पापा , अम्मा, तीन बड़ी बहनें , खुद से बड़े भईया और वह , संजू तो बचपन में ही चला गया . पढ़ाई , साहित्य और स्नेह का वातावरण रहा घर में , पराये की कोई परिभाषा ही नहीं दी गई . पडोसी सगा , दोस्त सगा .... मामा, चाचा,मौसी, भईया, दीदी संबोधन के साथ सब अपने थे . सीख तो निःसंदेह बड़ी अच्छी थी, सुनने , सुनाने में बहुत अच्छा लगता है - पर यह ख्याल तिल तिलकर मरने के लिए काफी था . पापा ने हमें 'अपनों' की विस्तृत परिभाषा दी , और उन सारे अपनों का अपना अपने संबंधों से रहा . पापा से प्रश्न उठाऊं , तर्क करूँ - उस वक़्त न इतनी हिम्मत थी , न सुलझे ढंग से बात रखना आता था . बहुत छोटी उम्र से यह मंथन चलता रहा और इसी मंथन ने मुझे खुद से बाहर निकलकर खुद को देखना सिखाया . ना सीखती तो सर सहलाकर खुद को राहत कैसे देती !
जन्म सीतामढ़ी (डुमरा ) . प्रारंभिक शिक्षा सीतामढ़ी(डुमरा) में हुई . पापा प्राचार्य थे , अम्मा के साथ कहानी, कविताओं से पहचान हुई .... 1970 में हम तेनुघाट आ गए , स्कूल की शिक्षा वहीँ पूरी हुई , फिर रांची महिला महाविद्यालय से स्नातक , हिस्ट्री ऑनर्स के साथ .
जीवन के उतार-चढ़ाव की बात करूँ तो बेतरतीब लकीरें खींचती चली जाएँगी .... बस इतना बताऊँ कि हर आड़ी तिरछी लकीरों के मध्य से निकल मैंने सोचा -
'मरण देख तुझको स्वयं आज भागे
उड़ा पाल माझी बढा नाव आगे ...'
और मेरी पतवार को सार्थक बनाया मेरे तीन बच्चों ने - (मृगांक, खुशबू, अपराजिता ). इतनी मजबूती से पतवार को थामा कि बिना पाल खोले भी हम आगे बढ़ गए . 2007 में खुशबू ने मेरे लिए ब्लॉग बनाया , जिसमें मदद मिली हिंदी ब्लौगिंग के जानेमाने चिट्ठाकार संजीव तिवारी से (http://aarambha.blogspot.com/) . हिंदी में कैसे शुरुआत हो, कैसे औरों से संपर्क हो यह उन्होंने ही बताया .
मैं तो कंप्यूटर देखते डर जाती थी, पर खुशबू ने मुझे सब सिखाया और धीरे धीरे मैंने पंख फैलाये . आकाश में कई सशक्त पंछी पहले से थे , अपनी उड़ान के साथ उन सारे पंछियों ने आनेवाले हर पंछियों का स्वागत किया . मैं सबकी शुक्रगुजार हूँ .
'कादम्बिनी' में तो बहुत पहले प्रकाशित हुई थी मेरी रचना - 'अकेलापन' ,(वर्ष तक याद नहीं ) उस समय उसके संपादक थे - श्री राजेंद्र अवस्थी जी .
'सिंह कभी समूह में नहीं चला
हँस पातों में उड़े
इन पंक्तियों का स्मृति बाहुल्य था
बहुत से ह्रदय मेरे संग नहीं जुड़े ...
जग को अपने से परे माना
मेरे जीवन की सम्पूर्णता आकाश में समा गई
जब इसे अपनी उपलब्धि मान
मैंने अपनाना चाहा
मेरे अकेलेपन को नींद आ गई '...........................
कलम मेरी शक्ति रही, भावनाएं मेरा आधार ... पर इससे परे भी मैंने बहुत कुछ किया . छोटे से स्कूल में पढ़ाया , टयूशन पढ़ाने गई, प्राइवेट बैंक में काम किया , हर्बल उबटन बनाया ..... लेकिन मेरा सुकून मेरा ब्लॉग बना .अपने होने का एहसास होता है , कोई मुझे पढ़ता है - इसकी ख़ुशी होती है . फिर मैं हिन्दयुग्म से जुडी ... 'ऑनलाइन कवि सम्मलेन ' 'गीतों भरी कहानी ' ने मुझे एक अलग पहचान दी . हिन्दयुग्म से ही मेरा काव्य-संग्रह 'शब्दों का रिश्ता' प्रकाशित हुआ और जनवरी 2010 के बुक फेयर में इमरोज़ के द्वारा उसका विमोचन हुआ और लोगों के बीच मेरी पहचान बढ़ने लगी. फिर रवीन्द्र प्रभात जी की परिकल्पना से मैं जुडी (2010 में ), वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री के सम्मान के साथ मैंने ऑनलाइन वटवृक्ष का संपादन शुरू किया रवीन्द्र प्रभात जी के साथ .फिर 30 अप्रैल 2011 को त्रैमासिक पत्रिका के रूप में इसे हमने लोगों के मध्य रखा . मेरे संपादन में 'अनमोल संचयन ' , ' परिक्रमा ' का प्रकाशन हुआ , ' अनुगूँज ' प्रकाशनाधीन है.
ये सारे कार्यकलाप खुद में रहने का उपक्रम है, अन्यथा -' दुनिया चिड़िया का बसेरा है , ना तेरा है ना मेरा है ....'

40 टिप्‍पणियां:

  1. आप जैसी हस्ती का ब्लॉग जगत में हमारे साथ होना सौभाग्य की बात है.
    आज आपके बारे में इतना कुछ जानकर बहुत बहुत अच्छा लगा.


    सादर

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  2. meri mausi sabse pyari sabse nyari....shabdon mei aapko nahi sameta ja sakta mausi...lov u...

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  3. जिस काम से स्वयं को संतुष्टि मिले , वही सर्वोत्तम है ।
    गृहस्थ जीवन में बच्चे ही अपना संसार होते हैं , विशेषकर एक मां के लिए ।

    आपको अच्छे संस्कार मिले , अब बच्चों को भी मिले होंगे , ऐसा विश्वास है ।

    हम जैसे दिल्ली वासियों को छोटे शहरों के जन जीवन के बारे में जानकर बड़ा अच्छा लगता है । वहां अभी भी कहीं न कहीं मौलिकता है ।
    शुभकामनायें रश्मि जी ।

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  4. लगभग 2008 -09 से आपके ब्लाग का नियमित पाठक हूं और आपकी लिखी क्षणिकायें ही पढता रहा। आपके बाबत कुछ तो आपने ब्लाग पर ही लिख दिया था । पूर्ण जानकारी आज पढी। आपका तो जन्म ही साहित्य सृजन हेतु हुआ है। फिर वैसा ही घर व वातावरण मिला । काबुलीवाला कह कर बहुत पुरानी पढी हुई कहानी की याद आगई।

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  5. रश्मि जी ,

    मुझे तो याद ही नहीं की मैं आपसे कब और कैसे जुडी ..ऐसा लगता है कि न जाने कितने वर्षों से साथ है .. हमेशा आपने मुझे याद रखा है .. इस ब्लॉग जगत की यह मेरे लिए उपलब्द्धि है कि आपका साथ मिला .. मिन्नी .... मेरी बेटी का नाम भी है ..घर में उसे इसी नाम से पुकारते हैं ...अब तो यह नाम कभी भूल ही नहीं जा सकता :) आपकी कलम से आपका परिचय अच्छा लगा ....

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  6. सपनों की दुनिया में रहने वाला ही इस अन्दाज़ में अपना परिचय दे सकता है..जितना जाना बहुत भाया लेकिन लगा कि अभी तो बादल का एक छोटा सा टुकड़ा ही दिखाया.. :)

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  7. आंटी यह जरुर हमारे किसी पुण्य कर्मों का नतीजा है,कि आपका आशीष प्राप्त हो रहा है....आपका व्यक्तित्व उजले आसमां सा है जो खुद में न जाने कितने पंक्षियों को उड़ान भरने का माहौल देता है.....आप हमारे लिए वंदनीय है...बस यूँही आशीर्वाद बनाये रखे.......चरण स्पर्श।

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  8. आपको आपके द्वारा जानना अच्छा लगा।

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  9. जैसा सोचा था उससे भी कही जायदा प्रभावपूर्ण आपकी हस्ती है ... ये हम लोगो का सौभाग्य है की आपके द्वारा हम्रारी कविताये पढ़ी जाती है ... सुच मानिये आप मेरे ब्लॉग पर आ कर जब कमेंट्स लिखती है तब मुझे लगता है की अब मैं जरुर कुछ ऐसा लिखा है जो पढने लायक है .... मैं हमेशा सोचती हूँ की मैं आप जैसा थोडा भी लिख सकू ..पर नही कर पाउंगी क्यों की आप ने अपनी जिन्दगी अनुभवों को शब्दों में उतारा है ... आप से जिन्दगी का कोई अभी एहसास अनछुआ नही रहा है ... आपने जिन्दगी के हर पहलू को कविता के रूप में हमारे सामने रखा है... हर पंक्ति हमें एक सीख देती है... जिन्दगी को और जानने की...!!! जिसके लिए धन्यवाद कहना काफी नही होगा... ... हम सभी आपके इस योगदान के लिए बहुत- बहुत आभारी रहंगे...... !!!

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  10. charan sparsh.

    beterteeb aadi tirchhi rekhaaon mein chhipi hain aap..jo dikhti naheen..unhi na dikhne waali lines ko parh ke mere aansu aa gaye..

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  11. आपके बारे में मिली जानकारी आप से ही जान कर बहुत अच्छा लगा ....दीदी
    आपने बारे में लिखना बहुत मुश्किल रहा होगा .....पर सच में पढ़ कर अच्छा लगा

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  12. आपके ब्लॉग पर हर बार आकर कुछ नया मिल जाता है . आपका परिचय हो या किसी और शख्शियत का . और कविताओं में भी वैसी ही एक नयी दृष्टि . कुछ नियमित अभ्यास की तरह होता जा रहा है आपके ब्लॉग को देखना . हर बार टिप्पणी संभव नहीं हो पाती . पर आज छुट्टी है . आपका हक बनता है

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  13. आज आपकी कलम से खुद आपका परिचय पढ़कर मन मानो प्रसन्न हो गया ..ऐसा लगा मानो गुलशन में बहार आ गई हो ...आपकी कविताओं की तो कायल हूँ ही मै आज आपका जीवन परिचय जान कर और सुकून मिला ..आपकी जितनी प्रतिभा तो नही है ..आपका साथ पाकर ही धन्य हूँ ...

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  14. रश्मिजी
    आपके द्वारा आपको जानना बहुत अच्छा लगा \
    ब्लॉग जगत में मै तो आपको अपना गुरु ही मानती हूँ |आपके संक्षिप्त शब्द प्रेरणा से भर देते है |और आज आपकी यहाँ तक की yatra पढ़कर दिशा ही मिली |
    आप इसी तरह हमें सजग करती रहे |आभार |

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  15. आपकी रचनाएँ मुझे हमेशा बहुत अपनी- सी लगी , बात करती हुई ...ब्लॉग पर पहले दिन से ही आपको जानती रही , मगर अब लगता है शायद पहचान पुरानी है ....आपका होना एक सुकून -सा है बहुत से ब्लोगर्स के लिए जो आप बिना कहे कहती हैं " मैं हूँ ना " ....
    आपकी सादगी और श्रेष्ठ व्यक्तित्व की मैं हमेशा से फैन रही हूँ ...
    ढेरों शुभकामनाये !

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  16. रश्मि दी ...प्रणाम ...जीवन में तुम बड़ी हो सुनते सुनते ...जैसे कान ही पाक गए थे मेरे ....मन तो छोटा ही होता है न ..मन कहाँ बड़ा होता है ...?लगता था कोई तो हो ..जिसके आँचल के साये की छाया मुझको भी मिले ...मैं सोचती थी ....बहुत सोचती थी ..कभी कोई बड़ी बहन मिलेगी ...ईश्वर ने आपसे मिला दिया ....आपका बड़प्पन ...संस्कारों से भरा हुआ मन ...बहुत गुरुत्वाकर्षण है आपके व्यक्तित्व में ....आज आपने अपना संक्षिप्त सा परिचय दिया ....बहुत अच्छा लगा पढ़कर ..आपका काव्य तो आपका परिचय ...आपकी गहन सोच का परिचय तो देता ही है .....आप जो भी कार्य करतीं हैं आपकी निष्ठां झलकती है ...आपको मेरी ढेर सारी शुभकामनायें ....

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  17. "आपका लेखन, आपकी भावनाएँ
    रहें समृद्ध, सभी को राह दिखाएँ "
    सादर....

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  18. आपके जीवन में झांक कर बहुत अच्छा लगा . बस एक चीज का समय भी मिला साहित्य के नाम पर पहला कदम कादम्बिनी से ही रखा . जो भी जीवन में चलता है उससे अलग कुछ करना अपने आप में एक उपलब्धि ही कही जाएगी . आपके प्रयास सराहनीयहैं.

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  19. खुश्बू ने जो सुमधुर खुश्बू फैलायी उसकी खुश्बू हम तक भी पहुँच रही है.

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  20. बस यही एक कमी थी, जो आपने अपने बारे में कहकर पूरी कर दी..... आपको ब्लॉग से तो जाना ही है, आज खुद आपके शब्दों में जानकर और भी अच्छा लगा. मेरा सौभाग्य है जो आपसे मुझे ब्लॉग जगत में मिलने का मौका मिला. वटवृक्ष तो आप खुद ही है. ऐसे सबको समा के रखती है कि पूछिए मत! बस आपकी छाया हमेशा सब पर बनी रहे.

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  21. मेरी बडी दिली इच्छा थी आपसे मिलने की और वो साकार हुई हिन्दी भवन मे…………जैसा सोचा उससे बढकर पाया ……………आपका इतने अपनत्व से मिलना और अधिकार से बात करना ऐसा लगा जैसे कोई बडी बहन हो और एक इंसान को इससे ज्यादा चाहिये भी क्या होता है……………आज इस श्रृंखला मे आपका पूर्ण परिचय पाकर मन आनन्दित हुआ………उम्मीद करती हूँ आपके मार्गदर्शन मे हमारा भी ज्ञानोदय होगा।

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  22. न जाने क्‍यों लगता है रश्मि जी कि अभी भी आपका परिचय अधूरा ही है। आपका व्‍यक्तित्‍व की प्रखरता आपके चेहरे पर झलकती है, उसका तेज आपकी कविताओं में उतरता है। मेरा मन कहता है कि कुछ और भी है जो सचमुच आपको मिन्‍नी से रश्मि बनाता है।

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  23. अहा क्‍या सौभाग्‍य है ... आप और आपका परिचय बस इसी क्षण का इंतजार था ... सबसे पहले तो बहुत-बहुत शुक्रिया आपका....बाकी सब बाद में ...।

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  24. ब्‍लॉग जगत में आपकी रचनाओं को पढ़ना हमेशा से ही सुकून देता रहा है कई नये ब्‍लॉगर ऐसे हैं जो आपकी टिप्‍पणी को आपका आशीष समझते हैं आप काफी समय से सब का परिचय दे रही थीं ..सब आपके बारे में विस्‍तार से जानना चाहते थे, हां अपने बारे में कहना थोड़ा मुश्किल तो होता है पर आपकी यह खूबी कि आप 'ना' नहीं करती और ना ही निराश तो आज आपके बारे में जानकर अच्‍छा लगा..बस आपका यह सृजन यूं ही चलता रहे अनन्‍त..अनन्‍त शुभकामनाएं आपके लिये ।

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  25. मैने आपसे कई बार कहा आप अपना परिचय दें, आपने जितने लोगों से मिलवाया मैने सबको पढ़ा पर कमेंट नहीं किया ..जानती हैं बस मन में यह ठान लिया था कि जब आप अपने बारे में कहेंगी तभी मैं कुछ कहूंगी ...इसके लिये एक लम्‍बा सा शुक्रिया ... हां सबसे पहले आना था पर विलम्‍ब हो गया उम्‍मीद नहीं थी आज आप होंगी वह खास शख्‍स ...जिनके बारे में मुझे विस्‍तार से जानना है आपका नाम बहुत प्‍यारा है वो घर वाला ...बिल्‍कुल आपकी रचनाओं की तरह ...फिर आऊंगी ..जल्‍दी ही ..।

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  26. sirf ek halki si muskurahat aa gayee...:)
    abhi to bahut aage jana hai "di" tumhe...!!:)

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  27. आपके परिवार के साहित्यिक वातावरण का आभास ...आपकी रचनाएं ही करा देती हैं...
    जिन्हें ऐसे संस्कार मिले हों...शब्दों के धनी का साथ मिला हो...फिर उस रश्मि के लेखन से तो हर कोना रौशन होना ही था.

    इंतज़ार में ही थी...आप अपना परिचय कब देंगी...अच्छा हुआ ज्यादा देर नहीं की...मैंने पढ़ने में जरूर देर कर दी :(

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  28. aapke baare me jaan kar acchha laga...aapki khushboo ki khushboo paakar ham bhi prasannchit ho gaye.

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  29. यही एक कमी थी बस.कितना जाना आपके बारे में फिर भी कम जाना था.बहुत अच्छा लगा आपसे ही आपको जानकर.

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  30. आपसे कभी मिलना नहीं हो पाया अब तक पर लगता है की कई बार मिली हूँ आपसे :) आपका व्यक्तित्व बहुत प्रभावित करता है मुझे ..बहुत अच्छा लगा आपके द्वारा आपको जानना

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  31. Aaj aapke baare mein aapke dwara yun jaankari hasil kar man ko bahut achha laga..
    Bahut der se hi sahi lekin pahunchkar bahut achha laga...
    AApko meri haardik shubhkamnayen..

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  32. रश्मि जी एक बात कहना है
    इन शब्दों के बीच मैं कितना कुछ पढते गयी , आपसे प्रेरित होती रही.
    कितना अच्छा लगता है जब इंसान अपनी आत्मा और अपनी रूह से जुड़ा होता है
    आपने बोहोत कुछ किया लेकिन आपको असली शांति तब मिली जब आपके शब्दों आपकी भावनाओं को एक माध्यम मिला
    आपके विचार जब हम तक आये हमें भी एक संवेदनशील हृदय का आस पास होने का आभास मिला
    आपसे कुछ सीख सकूं ऐसी उम्मीद है खुद से
    आभार
    स्वाति

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  33. सुन्दर प्रभावशाली परिचय...
    ढ़ेर सारी शुभकामनायें!
    सादर!

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  34. सुनीता जी की नई पुरानी हलचल से चल कर आपकी प्रोफाइल पर चला आया और यह पोस्ट खुल गई.
    आपका जीवन परिचय बहुत ही प्रेरणादायक और रोचक है.
    आपके लेखन का मै जब से ब्लॉग जगत में आया तभी
    से कायल हूँ.ईश्वर की कृपा की अनुभूति होती है
    आपके ब्लॉग पर आकर.

    आभार.

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  35. aapke bare me jaan kar kafi achchha laga.apne meri post par comment kiya ki "KASHMKSH HO TO-JOPAHLE MAN ME AAYE USE MAAN LO""ye shabd mere liye prerana hai..
    .....apka abhar....

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  36. सचमुच संडे का पूरा आनंद ले रहे हैं आप जो न देख पाये हैं आज की यह खुशनुमा हलचल :) आज कीनई पुरानी हलचल

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  37. रस्मिजी आपके विषय में जान कर अभिभूत हो गयी

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  38. क्या कहूँ आपके बारे में , ऊपर आये ढेरों कमेंट्स में सब कुछ तो कहा जा चुका है |
    लेकिन एक बात के लिए आपको धन्यावाद दूंगा , आपकी ये पोस्ट पढकर न जाने क्यूँ मेरा मन ये कर रहा है कि मैं भी अपनी माते (यही कहता हूँ अपनी माँ को) को कुछ पल ही सही अपने लिए अपनी खुशियों के साथ अपनी जिंदगी जीने के लिए प्रेरित करूँ |

    पूरा जीवन झोंक दिया ,
    मेरा टिफिन बनाने में ,
    बिखरे बालों में मेरी माँ ,
    मुझको लगी सजाने में |

    सादर

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